6 अप्रैल को चेक बाउंस हुआ तो हो सकती है जेल – जानें सुप्रीम कोर्ट का नया नियम Cheque Bounce Law

By Shreya

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Cheque Bounce Law – भारत में व्यापारिक और व्यक्तिगत लेन-देन में चेक का इस्तेमाल दशकों से होता आ रहा है। लेकिन जब यही चेक बैंक से वापस लौट आए, तो मामला महज एक वित्तीय चूक नहीं रह जाता — यह एक गंभीर आपराधिक मामला बन जाता है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने चेक बाउंस के मामलों को लेकर देशभर की अदालतों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसका मकसद साफ है — जो लोग जानबूझकर चेक बाउंस कराते हैं या मुकदमे को वर्षों तक खींचते रहते हैं, उन्हें अब कानून के शिकंजे से बचना आसान नहीं होगा।


आखिर चेक बाउंस होता क्यों है?

चेक बाउंस की सबसे आम वजह तो यही है कि जब कोई व्यक्ति भुगतान के लिए चेक देता है, लेकिन उसके खाते में उतनी रकम मौजूद नहीं होती। ऐसे में बैंक उस चेक को अस्वीकार करके वापस कर देता है। हालांकि इसके अलावा भी कई तकनीकी कारण हो सकते हैं, जैसे —

  • बैंक खाते में अपर्याप्त राशि होना
  • चेक पर किए गए हस्ताक्षर का मेल न खाना
  • संबंधित बैंक खाता बंद हो जाना
  • चेक में तिथि, राशि या अन्य जानकारी में कोई चूक होना

जब भी चेक बाउंस होता है, बैंक एक रिटर्न मेमो जारी करता है जिसमें वापसी का कारण स्पष्ट रूप से दर्ज होता है। यही मेमो आगे की कानूनी कार्रवाई का आधार बनता है।

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क्या कहता है कानून?

भारतीय कानून में चेक बाउंस को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। यह कानून इसलिए बनाया गया था ताकि व्यापारिक लेन-देन में विश्वसनीयता बनी रहे और कोई भी जानबूझकर दूसरे को ठग न सके।

इस धारा के अंतर्गत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को निम्न दंड भुगतना पड़ सकता है —

  • अधिकतम दो वर्ष का कारावास
  • चेक की मूल राशि का दोगुना जुर्माना
  • अथवा दोनों दंड एक साथ

यानी अगर किसी ने एक लाख रुपये का चेक दिया और वह बाउंस हो गया, तो अदालत उस पर दो लाख रुपये तक का जुर्माना लगा सकती है।

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सुप्रीम कोर्ट की नई सख्ती — अब नहीं चलेगी टालमटोल

पहले इन मामलों में एक बड़ी समस्या यह थी कि अदालतों में सुनवाई वर्षों तक खिंचती रहती थी। आरोपी बार-बार तारीख लेते और पीड़ित न्याय के लिए भटकता रहता। लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर लगाम लगाई है।

नए निर्देशों के तहत —

  • चेक बाउंस मामलों की सुनवाई निर्धारित समय सीमा में पूरी करनी होगी
  • यदि आरोपी बार-बार अदालत में पेश होने से बचता है या सुनवाई टालने की कोशिश करता है
  • तो उसकी जमानत तक रद्द की जा सकती है

यह बदलाव पीड़ितों के लिए एक बड़ी राहत है, जो अब तक न्याय पाने में वर्षों गंवा देते थे।

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चेक बाउंस होने पर क्या करें — पूरी कानूनी प्रक्रिया

अगर आपका चेक बाउंस हो गया है, तो घबराएं नहीं। नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करें —

पहला चरण — कानूनी नोटिस भेजें चेक बाउंस की जानकारी मिलते ही 30 दिनों के भीतर आरोपी को लिखित कानूनी नोटिस भेजना अनिवार्य है। यह नोटिस वकील के माध्यम से रजिस्टर्ड डाक से भेजा जाना चाहिए।

दूसरा चरण — 15 दिन की मोहलत नोटिस मिलने के बाद आरोपी के पास 15 दिन का समय होता है कि वह बकाया राशि चुका दे। यदि वह इस अवधि में भुगतान कर देता है, तो मामला वहीं सुलझ सकता है।

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तीसरा चरण — अदालत में शिकायत यदि आरोपी 15 दिन बाद भी भुगतान नहीं करता, तो पीड़ित संबंधित मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके बाद अदालत आरोपी को समन जारी करती है और सुनवाई प्रारंभ होती है।


चेक बाउंस से कैसे बचें?

थोड़ी सी सावधानी से आप इस कानूनी पचड़े से बिल्कुल दूर रह सकते हैं —

  • चेक जारी करने से पहले खाते में पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करें
  • चेक पर सही तारीख, सटीक राशि और स्पष्ट हस्ताक्षर करें
  • पोस्ट-डेटेड चेक देते समय विशेष सतर्कता बरतें
  • अपने बैंक के SMS अलर्ट और मोबाइल बैंकिंग ऐप का नियमित उपयोग करें
  • यदि गलती से चेक बाउंस हो जाए, तो तुरंत संबंधित व्यक्ति से संपर्क करें और भुगतान की व्यवस्था करें

डिजिटल भुगतान — एक समझदार विकल्प

आज के डिजिटल युग में UPI, NEFT, RTGS और IMPS जैसे माध्यम उपलब्ध हैं, जिनसे तत्काल और सुरक्षित भुगतान किया जा सकता है। इन विकल्पों में न तो बाउंस होने का डर है और न ही किसी कानूनी झंझट की आशंका। यही कारण है कि अब बड़े व्यापारिक लेन-देन में भी लोग तेजी से डिजिटल माध्यमों की ओर रुख कर रहे हैं।

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निष्कर्ष: चेक बाउंस को हल्के में लेने की गलती न करें। यह एक ऐसा मामला है जो आपको जेल की सजा और भारी जुर्माने तक पहुंचा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब इन मामलों में देरी की गुंजाइश बेहद कम हो गई है। इसलिए जब भी चेक के जरिए लेन-देन करें — सतर्क रहें, जिम्मेदार रहें और जरूरत पड़े तो किसी योग्य अधिवक्ता से कानूनी सलाह जरूर लें।

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