Old Pension Scheme – सरकारी नौकरी करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए साल 2026 एक नई उम्मीद लेकर आया है। रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा को लेकर बरसों से चली आ रही बेचैनी अब एक बार फिर सतह पर आ गई है। पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली को लेकर देशभर में कर्मचारी संगठन सक्रिय हो उठे हैं और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश तेज हो गई है।
क्या थी पुरानी पेंशन योजना?
जनवरी 2004 से पहले देश के सभी सरकारी कर्मचारियों को एक सुनिश्चित पेंशन मिलती थी। इस व्यवस्था के अंतर्गत सेवानिवृत्त कर्मचारी को उसके आखिरी मूल वेतन का करीब आधा हिस्सा हर महीने पेंशन के तौर पर दिया जाता था। इसके ऊपर महंगाई राहत भत्ता भी अलग से जोड़ा जाता था, जिससे समय के साथ पेंशन की रकम खुद-ब-खुद बढ़ती रहती थी।
सबसे अहम बात यह थी कि इस योजना में पेंशन का पूरा वित्तीय बोझ सरकार खुद उठाती थी। कर्मचारी को अपनी जेब से कोई कटौती नहीं करानी पड़ती थी। यही वजह है कि आज भी इस योजना को लेकर कर्मचारियों में गहरी आस्था बनी हुई है।
NPS से क्यों असंतुष्ट हैं कर्मचारी?
2004 के बाद आई नई पेंशन योजना यानी NPS में कर्मचारी और सरकार, दोनों मिलकर एक कोष तैयार करते हैं। यह पैसा शेयर बाजार और सरकारी बॉन्ड जैसे माध्यमों में निवेश किया जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि रिटायरमेंट के वक्त कर्मचारी को कितनी पेंशन मिलेगी, यह पूरी तरह बाजार की चाल पर टिका होता है।
बाजार अच्छा रहा तो फायदा, गिरा तो नुकसान। यही अनिश्चितता कर्मचारियों को सबसे ज्यादा परेशान करती है। उनका कहना है कि जीवन भर सरकारी सेवा देने के बाद बुढ़ापे में आर्थिक भविष्य को बाजार के हवाले नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
राज्यों ने दिखाई राह
देश के कई राज्यों ने केंद्र सरकार की राह से हटकर अपने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का तोहफा देने का साहस दिखाया है। राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश इस दिशा में कदम उठा चुके हैं। इन राज्यों के फैसलों ने बाकी प्रदेशों के कर्मचारियों में भी उम्मीद की नई किरण जगाई है और वहां के संगठनों ने भी मांग को और तेज कर दिया है।
OPS बहाल हुई तो क्या बदलेगा?
अगर व्यापक स्तर पर पुरानी पेंशन योजना लागू होती है, तो सरकारी कर्मचारियों की जिंदगी पर इसका गहरा असर पड़ेगा —
- निश्चित मासिक आय: रिटायरमेंट के बाद एक तय रकम हर महीने खाते में आएगी, जिससे वित्तीय नियोजन आसान होगा।
- परिवार को सुरक्षा: कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिजनों को फैमिली पेंशन मिलती रहेगी।
- महंगाई से राहत: पेंशन में समय-समय पर महंगाई भत्ता जुड़ने से क्रय शक्ति बनी रहेगी।
- सम्मानजनक जीवन: बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों के खर्च के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
कर्मचारी संगठनों की आवाज
देशभर के कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते खर्च को देखते हुए एक स्थायी और भरोसेमंद पेंशन व्यवस्था की जरूरत आज पहले से कहीं ज्यादा है। संगठनों की मांग है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और कर्मचारियों के हित में एक ठोस नीतिगत निर्णय लिया जाए।









